1 बुद्धिए सातो खम्बे खड़े करी की
आपणा कअर बणाया।
2 तेसे आपणे खाणे खे आपणे डांगर फाटे,
ओर आपणे अंगूरा रे रसो दे मसाला मलाया
ओर आपणी खाणे री मेज लगाई।
3 तेसे आपणियां दासिया सबी खे बुलाणे खे पेजिया,
सेयो शईरो री ऊच्चिया जगा रे चूँडिया पाँदे जाईकी आका पाओईया,
4 "जो कोई सीदा-सादा ए, से मुड़ी की मेरे कअरो रे पीतरे आओ!"
जो मूर्ख ए, तेसखे से बोलोई,
5 "आओ ओर मेरी रोटी खाओ,
ओर मसाला मिलेया रा अंगूरा रा रस पियो।
6 बुरेया लोका री संगत छाडो, ओर जिऊँदे रओ,
ज्ञानो रिया बाटा दे चलो।"
7 जो माणूं मजाक करने वाल़ेया खे शिक्षा देओआ, से बेज्जत ओआ,
ओर जो दुष्टो खे बकोआ, से कलंकित ओआ।
8 मजाक ड्वाणे वाल़े खे नि बक, एड़ा नि ओ कि से तां साथे बैर राखो,
बल्कि अक्लमंदो खे तेसरी पूला रिया तँईं बक, तेस तां साथे प्यार राखणा।
9 अक्लमंदो खे शिक्षा दे, तो से ओर बी जादा अक्लमंद ऊई जाणा;
तार्मिक माणूंए खे चतौणी दे, तो तेस आपणी बिद्या बढ़ाणी।
10 यहोवे रा आदर करना बुद्धिया री शुरूआत ए,
ओर परम पवित्र परमेशरो खे जाणना ई समज ए।
11 मां बुद्धिया रे जरिए ई तेरी उम्र बढ़नी,
ओर तूँ बऊत साला तक जिऊँदा रणा।
12 जे तुसे समजा खे अपनाओंगे तो तुसा खे ई फाईदा ऊणा,
ओर जे तुसे तिजी खे नि अपनाओंगे तो तुसा खे ई कष्ट ऊणा।
13 मूर्ख जवाणस तेसा जवाणस जेड़ी ए; जो बक-बक करोई;
से तो निर्बुद्धि ए ओर कुछ नि जाणदी।
14 से आपणे कअरो रे द्वारो पाँदे,
ओर शईरो री ऊच्चिया जगा दे आसण लगाई की बैठी री।
15 से तिना लोका खे जो आपणियां-आपणियां बाटा रे सीदे जाओए,
तिना खे से ये बोली-बोली की आका पाओई,
16 "जो कोई सीदा-सादा ओ, से मुड़ी की मेरे कअरो रे पीतरे आओ;"
जो नासमज ए, तेसखे मूर्खता ये बोलोई,
17 "चोरिया रा पाणी मीठा ओआ
ओर लूकी-छिपी की रोटी खाणी अच्छी लगोई।"
18 तेसा रेया दुखिया खे पता नि ए कि लोक मरी जाओए जो तेसा जवाणसा रे कअरे जाओए,
कि जो लोक पईले तेती जाई चूकी रे, सेओ एबे मरेया रेया दुनिया दे डुबी गे रे।