1 मस्सा रे राजा लमूएलो रे असरदार वचन, जो तेसरिये माये तेसखे सिखाए थे।
2 तेसरिये माये तेसखे बोलेया, "ओ मेरे पाऊ,
ओ मेरे आपणे पाऊ! ओ मेरी मान्नता रे पाऊ!
3 आपणी तागत जवाणसा खे नि देणी,
ओर ना आपणी जिन्दगी तिना रे वशो रे करनी, जो राजेया री मर्दानगी खाई जाओईया।"
4 ओ लमूएल, राजेया रा अंगूरा रा रस पीणा तिना खे शोभा नि देंदा,
ओर ना ई तिना खे जादा शराब पीणे री इच्छा राखणी चाईयो।
5 एड़ा नि ओ कि सेयो शराब पी की काईदे-कानून ई पूली जाओ,
ओर केसी दु:खिये रे अक्को खे मारो।
6 तेज अंगूरा रा रस तेसखे पल़्याओ जो मरने वाल़ा ए,
ओर अंगूरा रा रस उदास मनो वाल़ेया खे ई देणा;
7 ताकि तिजी खे पी की सेयो आपणी गरीबिया खे पूली जाओ
ओर आपणी मईणत फेर याद नि करो।
8 तिना लोका रिया तरफा ते बोल जो आपू खे नि बचाई सकदे,
ओर सबी अनाथा रा न्याय ठीक-टंगो रे करेया कर।
9 तिना रिया तँईं बोल ओर एक ईमानदार न्यायी बणी की गरीबा ओर जरूरतमंदा रे अधिकारो री रक्षा कर।
10 एक खरी लाड़ी केसखे मिली सकोई?
कऊँकि तेसा री कीमत मूँगेया ते बी केथी जादा ए।
11 तेसा रा लाड़ा तेसा पाँदे बऊत परोसा करोआ,
ओर तेसखे किजी बी चीजा री कमी नि ऊँदी।
12 से आपणे लाड़े साथे कदी बी बुरा बर्ताव नि करदी,
बल्कि तेसखे अच्छा ई सोचोई।
13 से ऊन ओर सण टोल़ी-टोल़ी की ल्याओई,
ओर आपणे आथो साथे खुशिया ते काम करोई।
14 से बपारो रे जाह्जो जेड़ी आपणे खाणे रिया चीजा खे दूरा ते मँगवाओई।
15 से तड़के ई उठी की रोटी बणाओई,
ओर आपणे कअरो वाल़ेया खे खाणा खुल़ाओ ई,
ओर आपणी दासिया खे लग-लग काम देओई।
16 से सोची-समजी की डोरूआ खे मोले लओई,
ओर से मईणत करी की तिदे अंगूरा रा बगीचा लगाओई।
17 से आपणे लको खे कसी की बानोई,
ओर आपणियां बांयी खे मजबूत बणाओई।
18 से परखी लओई कि माखे बपारो दे कदी फाईदा ऊणा।
ओर से राती तक काम करदी रओई।
19 से ताऊकल़िया दे आपू ऊन कातोई,
ओर चरखे दे आपू खे टाल्ले बणाओई।
20 से दिलो ते गरीब ओर जरूरतमंद लोका री मताद करोई।
21 से यिऊँदो रे आऊणे ते नि डरदी,
पर से पईले ई आपणे परिवारो खे गर्म टाल्ले बणाई लओई।
22 से सरयाणे बणाई लओई,
तेसा रे टाल्ले छोटे सण ओर बैंगणी रंगो रे ओए।
23 जेबे तेसा रा लाड़ा सभा रे देशो रे बुजुर्गा साथे बैठोआ,
तेबे तेसरी इज्जत ओई।
24 से सणो रे टाल्ले बणाई की बेचोई,
ओर बपारिया खे लको रा पटका बणाई की बेचोई।
25 से तागतबर ओर प्रतापो ते परी री ओई,
ओर आऊणे वाल़े बखतो ते नि डरदी।
26 से हमेशा अक्ला रिया गल्ला बोलोई,
ओर से कृपा ते सबी खे सला देओई।
27 से आपणे कराने रे चाल-चलणो खे त्यानो रे देखोई,
ओर से कदी बी आल़सीपन नि दखांदी।
28 तेसा रे माठे उठी-उठी की तेसा खे तअन्य बोलोए,
तेसा रा लाड़ा बी उठी की तेसा री एड़ी तारीफ करोआ,
29 से तेसा ते बोलोआ, "बऊत सारिये जवाणसे आपणे कअरे अच्छे-अच्छे काम तो कित्ते, पर तूँ तिना सबी ते श्रेष्ठ ए।"
30 शोभा तो चूठी ओर सुन्दरता बेकार ए,
पर जो जवाणस यहोवे रा डर मानोई, तेसा री तारीफ ऊणी।
31 एड़िया जवाणसा री इज्जत करनी चाईयो,
ओर तेसा रे कामो री सभा दे तारीफ करनी चाईयो।