3 "लोग बोला बिधाता लै इहअ, ‘हाम्हैं रहै ब्रतू, तंऐं निं हाम्हां बाखा धैन ई दैनअ! हाम्हैं दैनअ आप्पू लै खास्सअ दुख। ज़ै ताह धैन ई निं दैणअ, तै किज़ू पल़ी हाम्हां भुखै रहणें?’"
बिधाता बोला तिन्नां लै इहअ, "असली गल्ल आसा एही कि ब्रते धैल़ी बी भाल़ा तम्हैं आपणअ ई फाईदअ अर तेभै कराऊआ तम्हैं आपणैं दासा का दुगणअ काम। 4 थारै ब्रतू रहणैंओ फल निखल़ा इहअ कि तम्हैं हआ रोश्शै आप्पू मांझ़ै झ़घल़दै लागै दै। तम्हैं कै सोठा कि इहअ ब्रत डाही करै कै मुंह थारी अरज़ शूणीं हेरनी? 5 ब्रतू रही दैआ तम्हैं मणछ आप्पू लै दुख, तम्हैं करा मधनूंए घाह ज़िहअ धरनीं उटअ मूंड, धरनीं खिंथल़ी छ़ैई अर घेरी छ़ार मल़ी करा तम्हैं दखाअ। एता लै बोला तम्हैं ब्रत? तम्हैं कै सोठा कि थारै इहअ करनै करै हुंह बिधाता खुश जाणअ हई?
6 "ज़िहअ ब्रत हुंह च़ाहा सह आसा इहअ कि ज़ुंण थोघै बाझ़ी गलाम आसा बणाऐं दै तिन्नां करा गलामीए जूँआं पोर्ही काढी आज़ाद। तिन्नां राश्शी चोल़ा पोर्ही ज़ेता करै लोग गलाम आसा बणाऐं दै। ज़ुंण ज़ोरा-ज़ोरी हंतै दै आसा, तिन्नां छ़ाडा पोर्ही।