2 सारअ भ्रमंड आसा मंऐं बिधाता आपणैं हाथै बणाअं द! ईंयां सोभै च़िज़ा आसा मेरी ई! हुंह हआ तिन्नां मणछा का खुश ज़ुंण घमंड निं करदै, ज़ुंण बूरी गल्ले माल़ी च़ेता अर ज़ुंण मेरी डरा हेठै रही ज़िहअ हुंह बोला तिहअ ई करा।66:2 भज. 34:18; मोत्त. 5:3
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