45 "ज़हा कोहल़ निखल़े, सह रहै लैल़ी बणी, नां आपणैं मुंडै कांगी लाई, नाका तैणीं डाहै आपणीं खाख शाट्टै करै बुदरी अर बाता हांढदी रहै ज़ोरै-ज़ोरै इहअ बोल्दअ लागी, ‘हुंह आसा छ़ोतलअ, हुंह आसा छ़ोतलअ।’ 46 ज़ेभै तैणीं तेऊ कोहल़ रहे, तेभै तैणीं आसा सह छ़ोतलअ अर सह रहै तेभै तैणीं सोभी का ज़ुदअ गराऊंआं अर बसती बागै दूर एक्कै ज़ण्हअ।13:46 लूक. 17:12
Publicidade