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2 इतिहास 34

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1 िियहकरण ा, िआठ ा, अर यरशलइकतीं करदरहा। 2 उसनकरययहनजर ै, अर िउसकलपऊद रहा, उनकरअर उसतओळओडा, अर ओड़।

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3 ा, िउस ीं गदआठ अपणलपऊद परमसवर करण ा, अर रहवें ्‍ां अर अशरतां अर अर ढळरतां करकै, यहअर यरशलकरण ा।34:3 यिर्मयाह की पैहली भविष्यद्वाणियाँ (यिर्म. 2, 3) योशिय्याह जरिये मूर्तिपूजा के निवारण के शरुआत्ती कोशिश के बखत करी सैं अर उनतै उसनै घणा साहस मिला होगा। 4 वतां उसकगई, अर रज रतिउनकउपपर ्‍ी, उसनी, अर अशी, अर अर ढळरतां ीं उसनििा, अर उनकउन णसां कबां ितरी, उननबलि चढ़ाे। 5 उनकिाँ उसनउनिाँ जळआखर उसनयहअर यरशलीं करया। 6 मनशे, एपअर िबलनपीं नगरां खणडहरां , उसनिाँ ीं िा, 7 अर अशअर रतां ीं िकर िा, अर इसएल रज रतिीं टकयरशलहडा।

िजरिमनदर मरममत

8 अपणअठरहवें िअर भवन ां कर ा, उसनअसलअर नगर िअर आहइतिखक आह ीं अपणपरमसवर यहभवन मरममत करतर िा। 9 उननििमहजक पयपरमसवर भवन गया, िदरबां मनशइयां, एपिां अर बचइसएलिाँ अर यहिाँ अर ि्‍िाँ अर यरशलिदयकठकरया, उस ीं ौंिा। 10 िउननउस ीं उन करण आळयां ौंियहभवन िे, अर यहभवन उन करण आळयां उस ीं भवन िा, उसकमरममत करण लगा। 11 िउननउस ीं बढइयाँ अर जमििाँ ीं िगढ़े पतथर अर ़ां तर कड़ी ें, अर उन घरां ैं यहजयां कर िे। 12 णस सच्‍करे, अर उनकअधिमर, यहत अर ओबद, अर कही, जकरअर मश्‍, चलआळअर ण-बजणण आळे। 13 िाँ अधिअर े-अर चलआळे, अर ुंसरदअर दरबे।

ियम-कयदििलण

14 िउस रपियहभवन हचगया, िरहे, ििजक जरियहियम-कयदििी। 15 ििकहा, "मन्‍यहभवन ियम-कयदििै;" ििीं िी। 16 उस िा, अर खबर ी, "ो-करमचिाँ ीं ौंगयउसनकर रहैं। 17 पययहभवन िा, उसनउन ीं उणिअर गरां ां ौंिै।" 18 बतिििजक ीं एक िै; उस ीं पढा। 19 ियम-कयदणकअपणकपड़े ़े। 20 िि, अह, अब, अर असअपणकरमचकम िा, 21 "थम ओडअर इसएल और यहरहण आळयां ओडइस िवचनां यहो; ूँयहबड़ीजलजलहट ांभडरखां यहवचन ा, अर इस ििकमां ळण करया।"

भवियव

22 ििऔर ां समनबिउसतउसिकरी, उस शल्‍जन्‍खत अर हसअर वसलय रखवा: अर जन्‍यरशलनयहल्‍रहवी। 23 उसनउनतकहा, "इसएल परमसवर यहकहवै, िणस ीं ा, उसतकहो, 24 यहकहवै, , इस जगहां अर इसकिदयबत यहिपढ़ी गई, उस ितनिैं उन रयकरुँा। 25 उन णसां ीं परवततर जळअर अपणबणिां जरिीं िै, इस रण जलजलहट इस जगहां भडउठै, अर ी। 26 पर यहिसनीं यहछण िउसतकहो, इसएल परमसवर यहकहवै, 27 ांणका, अर परमसवर अपणिा, अर उसकणकउसनइस जगहां अर इसकिदयिकही, तन्‍अपणिा, अर कपड़े ै, इस रण मन्‍ै; यहै। 28 , तन्‍रखां इसिि अपणकबहचा; अर बत इस जगहां ै, अर इसकिदयरणूं, उस तन्‍अपणां खणपड़ैा।’" उन णसां हडसनिा।

िजरिकम ्‍नण कसम

29 यहअर यरशलरनिां कठा। 30 यहणसां अर यरशलिदयअर जकां अर िाँ बले-बड़े रजणसां ीं यहभवन गया; उसनकरियहभवन िउस उन ीं पढ31 अपणजगहां खड़े ै, यहइस ऊमकरकरययहै-्‍ूँा, अर अपणसममन अर उसककमां, वनिाँ अर ििाँ ळण करुँा, अर इन करां इस ििैं, करुँा। 32 उसनउन रययरशलअर ि्‍उसकरकरवा: अर यरशलिदया, परमसवर उनकितरां परमसवर ा, उसककरिकरण े। 33 िइसएलिाँ ां अशिां करकितनइसएल िे, उन रयउपसनकर; िउनकपरमसवर यहउपसनकर; उसकवन भर34:33 जीवन भर योशिय्याह के राज्यकाल म्ह मूर्तिपूजा प्रत्यक्ष म्ह न्ही होवै थी। उन ीं अपणवजां परमसवर यहलणा।

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