जीवनदायी नदी
1 फेर वो माणस मेरै ताहीं भवन के दरबाजे पै बोहड़ा लेग्या; अर भवन की देहळी कै नीच्चै तै एक चोवा लिकड़कै47:1 एक चोवा लिकड़कै पाणी का दर्शन या इस सोत्ते तै लिकड़कै आशीष धरती के सारे निवासियां कै खात्तर जीवन देण आळा अर स्फूर्ति देण आळा था। पूर्व की ओड़ बह रह्या था। भवन का दरबाजा तो पूर्वमुखी था, अर चोवा भवन के पूर्व अर वेदी कै दक्षिण, की ओड़ नीच्चै तै लिकड़ै था। 2 फेर वो मेरै ताहीं उत्तर के फाटक तै होकै बाहर लेग्या, अर बाहर-बाहर तै घुमाकै बाहरी यानिके पूर्वमुखी फाटक कै धोरै पोंहचा दिया; अर दक्षिणी ओड़ तै पाणी पसीजकै बह रह्या था।