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भजन-संहिता 105:12-15

12 जब ओमन गनती म थोरकन ही रिहिन,

वास्तव म थोरकन रिहिन, अऊ ओ देस म अजनबी रिहिन,

13 ओमन एक जाति ले आने जाति,

अऊ एक राज ले दूसर राज म भटकत रिहिन।

14 त ओह कोनो ला ओमन ला सताय नइं दीस;

ओमन के हित म, ओह राजामन ला दबकारिस:

15 "मोर अभिसिक्त मनखेमन ला झन छुवव;

मोर अगमजानीमन के कुछू हानि झन करव।"

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