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भजन-संहिता 111

1 यहपरसकरव111:1 इबरानी म हलिलूयाह

ेंधवमनखमन डलअऊ सभ

अपन मन यहपरसकरहूं।

2 यहममन महं;

जऊन मन ममन ें, ओमन ममन ऊपर िकरथें।

3 ओकर ममन महिमय अऊ नद,

अऊ ओकर धरमपन हमबनरहिे।

4 ओह अपन अदममन रतकरहवय;

यहअनरहकअऊ दयअय

5 ओह ओमन वन े, मन ओकर भय नथें;

ओह अपन करहमरतरखथे।

6 ओह िगर ि मनखमन इयां अपन मनखमन

अपन सकि हवय

7 ओकर ांममन िसवसयअऊ ि;

ओकर जमियममन िसवसय

8 ओमन सदा-सरवदअटल रहिीं,

नमन िसवसययतअऊ ईमनदबनहव

9 ओह अपन मनखमन टकहवय;

ओह अपन करहमबर ठहिहवय

ओकर ांपबितर अऊ अदअय

10 यहभय मनई ि आत ;

जमो, जऊन मन ओकर ियममन नथें, ओमन अपन सहसमझ रखथें।

ओकर महिसदतक वत रहय

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