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भजन-संहिता 32:1-5

1 धइन अय ओ मनखे,

जेकर अपराध छेमा करे जाथे,

जेकर पाप तोपे जाथे।

2 धइन अय ओ मनखे,

जेकर पाप ला यहोवा ह ओकर बिरूध नइं गनय

अऊ जेकर आतमा म कोनो कपट के बात नइं ए।

3 जब मेंह कलेचुप रहंय,

त दिन भर कलहरत-कलहरत

मोर हाड़ामन बेकार होय लगिन।

4 काबरकि रात अऊ दिन

तोर हांथ ह मोर ऊपर भारी पड़िस;

अऊ जइसे घाम महिना के घाम म चीजमन सूखा जाथें

वइसे मोर बल ह कम हो गीस।

5 तब मेंह अपन पाप ला तोर आघू म मान लेंव

अऊ मोर अपराध ला नइं छुपांय।

मेंह कहेंव, "मेंह यहोवा के आघू म

अपन पाप ला मान लूहूं।"

अऊ तेंह मोर पाप के दोस ला

छेमा करय।

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