1 धइन अय ओ मनखे,
जेकर अपराध छेमा करे जाथे,
जेकर पाप तोपे जाथे।
2 धइन अय ओ मनखे,
जेकर पाप ला यहोवा ह ओकर बिरूध नइं गनय
अऊ जेकर आतमा म कोनो कपट के बात नइं ए।
3 जब मेंह कलेचुप रहंय,
त दिन भर कलहरत-कलहरत
मोर हाड़ामन बेकार होय लगिन।
4 काबरकि रात अऊ दिन
तोर हांथ ह मोर ऊपर भारी पड़िस;
अऊ जइसे घाम महिना के घाम म चीजमन सूखा जाथें
वइसे मोर बल ह कम हो गीस।
5 तब मेंह अपन पाप ला तोर आघू म मान लेंव
अऊ मोर अपराध ला नइं छुपांय।
मेंह कहेंव, "मेंह यहोवा के आघू म
अपन पाप ला मान लूहूं।"
अऊ तेंह मोर पाप के दोस ला
छेमा करय।
6 एकरसेति जम्मो बिसवासयोग्य मनखेमन तोर ले पराथना करंय
जब तेंह मिल सकत हस;
खचित संकट रूपी पानी के भयंकर लहरामन
ओमन करा नइं हबरहीं।