4 "ह यहव, मल मर जनग क अनत ल दख
अऊ मर जनग क कतक दन बच हवय, मल बत;
मल बत क मर जनग कइस तज स खतम हवथ।
5 तह मर जनग क दन ल सरप बत भर कर द हस;
मर जनग क थरकन बछरमन तर आघ म कछ न हय।
हर एक जन एक सस क सह अय,
अऊ त अऊ ओमन घल, जऊन मन सरकछत जन पडथ।
6 "खचत हर एक जन छइह क सह एत-ओत फरत रहथ;
बकर म ओमन भग-दऊड करक धन जम करत रहथ,
य जन बगर क मर क बद य धन ह ककर हह।