2 हे मनखेमन! तुमन कब तक मोर महिमा के बेजत्ती करत रहिहू?
तुमन कब तक भरम ले मया करत रहिहू अऊ लबरा देवतामन के खोज म रहिहू?
4 कांपत रहव अऊ4:4 या गुस्सा होके पाप झन करव;
जब तुमन अपन दसना म रहिथव,
त अपन मन ला जांचव अऊ चुप रहव।
6 बहुंते जन पुछत हवंय, "कोन ह हमर उन्नति करही?"
हे यहोवा, तोर मुख के अंजोर हमर ऊपर चमका।
7 जब ओमन के अनाज अऊ नवां अंगूर के मंद बहुंत होथे,
त तेंह मोर मन ला आनंद ले भर दे।
8 सांति से मेंह लेटहूं अऊ सुतहूं,
काबरकि हे यहोवा, तेंहीच ह
मोला सुरकछा म रखथस।