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भजन-संहिता 46:1-3,10

1 परमेसर ह हमर सरन-स्थान अऊ बल अय,

बिपत के बेरा म ओह मदद करे बर हमेसा तियार रहिथे।

2 एकरसेति हमन नइं डरन, चाहे धरती ह पलट जावय

अऊ पहाड़ ह समुंदर के गरभ म जा गिरय।

3 चाहे समुंदर के पानी ह गरजय अऊ ओमा ले फेन निकलय

अऊ ओकर बड़े लहरामन ले पहाड़मन कांप उठंय।

10 ओह कहिथे, "सांत रहव, अऊ ये बात ला जान लव कि मेंह परमेसर अंव;

जाति-जाति के मनखेमन के बीच मोर नांव ला ऊंचा करे जाही,

धरती म मोर नांव ला ऊंचा करे जाही।"

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