4 मोर हिरदय ह भीतरे-भीतर पीरा म हवय;
मिरतू के आतंक मोर ऊपर छा गे हवय।
5 डर अऊ कंपकपी मोला घेर ले हवय;
बहुंत भय के कारन मेंह बियाकुल हो गे हंव।
6 मेंह कहेंव, "कास, मोर एक पंड़की सहीं डेना होतिस!
त मेंह उड़ जातेंव अऊ अराम करतेंव।
12 कहूं कोनो बईरी ह मोर बेजत्ती करतिस,
त मेंह सह लेतेंव;
कहूं कोनो बईरी ह मोर बिरूध खड़े होतिस,
त मेंह ओकर ले छिप जातेंव।
13 पर येह तो तें अस, मोर सहीं एक मनखे,
मोर संगवारी, मोर लंगोटिया संगी,
14 जेकर संग परमेसर के घर म
एक समय मेंह संगति के आनंद उठात रहेंव,
जब अराधना करइयामन के बीच
हमन आवत-जावत रहेंन।
22 अपन जिम्मेदारी यहोवा ऊपर डार दे
अऊ ओह तोला संभालही;
ओह धरमी ला कभू
डगमगावन नइं देवय।