4 मोर हिरदय ह भीतरे-भीतर पीरा म हवय;
मिरतू के आतंक मोर ऊपर छा गे हवय।
5 डर अऊ कंपकपी मोला घेर ले हवय;
बहुंत भय के कारन मेंह बियाकुल हो गे हंव।
6 मेंह कहेंव, "कास, मोर एक पंड़की सहीं डेना होतिस!
त मेंह उड़ जातेंव अऊ अराम करतेंव।
17 सांझ, बिहनियां अऊ मंझन के बेरा
मेंह ओला दुख म पुकारथंव,
अऊ ओह मोर बात ला सुनथे।
22 अपन जिम्मेदारी यहोवा ऊपर डार दे
अऊ ओह तोला संभालही;
ओह धरमी ला कभू
डगमगावन नइं देवय।