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भजन-संहिता 68

5 परमसर अपन पबितर िहवय,

ओह अनथमन बर एक ददअऊ िधवमन बर एक रकछकरइय

6 परमसर अकमनखपरिबसे,

ओह मन गवअगवई करथे;

पर िदरमन रज गरमलसत इयां रहिें।

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