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Salmos 84

िरदसक बरि84:0 संभवतः संगीत के एक सबद िरह मन एक भजन

1 सरवसकियहा,

िबहुंघर े,

2 यहगनमन लसकरत

रछितक े;

तन अऊ मन

यत परमसर रथे।

3 सरवसकियहा, अऊ परमसर,

लकठ,

अऊ अऊ रइयिरई बसकरहवय,

अऊ अबिरई एक ोंधरबनहवय

ि उहां ओह अपन मन रख सकय

4 धइन ओमन, जऊन मन घर रहिें;

ओमन हमपरसकरत रहिें।

5 धइन ओमन, मन कत िलथे,

मन मन रथ-यतरलगरहिे।

6 जब ओमन 84:6 बाका याने कि बालसम रूख के घाटी या आंसू के घाटी ें,

ओमन ओलएक जगह बनें;

सरदकबरसघलकर तरिमन भर े।84:6 या आसीस

7 ओमन कत ऊपर कत तब तक आघबढरहिें,

जब तक ि ओमहर एक जन िपरमसर करनइहबर वय

8 यहा, सरवसकिपरमसर, परथन;

परमसर,

9 परमसर, हमर ;

अपन अभििजन ऊपर िरपकर

10 गनएक ि

अऊ कहीं हजिबनअय;

टमन रहबदल

ेंपरमसर घर रपवई पसकरहूं।

11 बरकि यहपरमसर रज अऊ ;

यहअनरह अऊ समे;

जऊन मन िरदबनरहिें, ओमन

ओह बनजमन अलग नइरखय

12 सरवसकियहा,

धइन अय मनखे, जऊन ऊपर भररखथे।

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