4 ओह अपन पांखी के खाल्हे म तोला ढांप लीही,
अऊ ओकर डेनामन के खाल्हे म तोला सरन मिलही;
ओकर बिसवासयोग्यता ह तोर ढाल अऊ झिलम होही।
5 रथिया के आतंक ले तोला डर नइं होही,
न ही ओ तीर ले डरबे, जेला दिनमान छोंड़े जाथे,
6 न ही ओ महामारी ले, जऊन ह छिपके पीछा करथे,
न ही ओ महारोग ले, जऊन ह दिन-दुपहरी म नास करथे।
15 ओह मोला पुकारही, अऊ मेंह ओला जबाब दूहूं;
संकट के बेरा म मेंह ओकर संग रहिहूं,
मेंह ओला छोंड़ाहूं अऊ ओला आदर दूहूं।