15 हन्ने ज्वाब दित्तेया, "ना, ओ मेरे स्वामी, आऊँ तो बऊत दु:खिया ए, मैं तो कोई नशा नि करी राखेया पर मैं आपणे मनो री गल्ल खोली की यहोवे खे बोली राखी। 16 आपणी दासिया खे कटीया जवाणस नि समज, जो कुछ मैं एबुए तक बोली राखेया, से बऊत ई दु:खी ओर परेशान ऊणे रिया बजा ते बोली राखेया।"