17 पय निक्खा अउ बुरा के ग्यान के जउन रूख हबै, ओखर फडुहा तै कबहुन झइ खाबे, काखे जउन रोज तै ऊ फडुहा के खाबे ता उहै रोज जरूर मर जइहे।
17 पय निक्खा अउ बुरा के ग्यान के जउन रूख हबै, ओखर फडुहा तै कबहुन झइ खाबे, काखे जउन रोज तै ऊ फडुहा के खाबे ता उहै रोज जरूर मर जइहे।