17 अउ आदम लग ऊ कथै, तै जउन अपन डउकी के बात सुने हबस, अउ जउन रूख कर फडुहा के बारे हे मै तोके आदेस दय रहों कि तै ओही झइ खाबे, ओही तै खाय हबस, इहैनिता जमीन तोर कारन सरापित हबै, तै ओखर उपजाऊ जीवन भर दुख के संग खाय करहे। 18 अउ ऊ तोर निता कांटा अउ किटिल्ली उगाही, अउ तै खेत के उपज खइहे। 19 अउ अपन माथा के पसीना के रोटी खाय करहे, अउ आखरी हे माटी हे मिल जइहे काखे तै उहै मसे निकारे गय हबस, तै माटी तो हबस अउ माटी हे फेरै मिल जइहे।