यिर्मयाह की फेर तै शिकायत
14 श्रापित हो वो दिन जिस म्ह मै पैदा होया! जिस दिन मेरी माता नै मेरे ताहीं जन्म दिया वो धन्य ना हो! 15 श्रापित हो वो आदमी जिसनै मेरे पिता ताहीं या खबर देकै उस ताहीं घणाए खुश करया के तेरै छोरा पैदा होया सै। 16 उस आदमी की हालत उन नगरां की जिसी हो जिन ताहीं यहोवा नै बिना दया के ढ़ा दिया; उसनै सबेरै तो चिल्लाहट अर दोपहर म्ह युद्ध की ललकार सुणाई दिया करे, 17 क्यूँके उसनै मेरे ताहीं गर्भ म्ह ए ना मारया के मेरी माँ का पेट ए मेरी कब्र होन्दी, अर मै उसे म्ह सदा पड़या रहन्दा। 18 मै क्यूँ उड़दंग अर शोक भोग्गण कै खात्तर जाम्या अर के अपणे जीवन म्ह मेहनत अर दुःख देक्खूँ, अर अपणे दिन बदनामी म्ह गुजारुँ?