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यिर्मयाह 22

ि

1 यहकहा, "यहभवन वचन कह, 2 ऊद गदिजमयहा, अपणकरमचिाँ अर अपणरजणसां समइन टकां आयकरैं, यहवचन 3 यहकहवै, अर िकतकरो; अर ीं करण आऴाअर परदी, अनअर िधवउडकरो, इस जगहां कसां लहबह4 ो, थम इसकरे, इस भवन टकां ऊद गदिजमरथां अर ां चढ़े अपणे-अपणकरमचिाँ अर रजसमबडकरयकरैंे। 5 ी, थम इन ां ीं ो, अपणकसम कहूँ ूं, यहै, भवन उजा।22:5 मत्ती 23:38; लूका. 13:35 6 ूँयहयहइस भवन कहवै, ीं ििअर लबििपड़ै ै, पर पक्‍ीं मरथल एक िजन नगर बण22:6 मरुस्थल या एक निर्जन नगर बणाऊँगा जै दाऊद का घराना परमेसवर का वचन न्ही सुणैगा तो वो आण आळे बखत म्ह चाहे लबानोन के जिसा महान हो, तोभी परमेसवर उसनै जंगळ बण्या देवैगा।7 करण आळयां ीं हथििूँा; दर वदां ीं टकआग ोंैंे। 8 ि-ि णस िइस नगर िकडएक सरें, यहइस बड़े नगर इसदशूँ करै?’ 9 णस कहवैंे, इसकरण उननअपणपरमसवर यहकरीं सरवतां ीं दणडवत करयअर उनकउपसनकरी।’"

शल्‍िमयसन

10 मरतर , उसकतर िकरो। उसतर ट-फटकपरदचलगयै, ूँहडअपणजनम-भि ीं कदखण ा। 11 ूँयहिशल्‍, अपणििजगहां अर इस जगहां िकडा, उसकयहकहव"उरहडआण ा। 12 िजगहां गयउसमर ा, अर इस ीं कदखण ा।"

यहिमयसन

13 "उसपअपणघर अधरअर अपणउपपर आळठड़िाँ अनबणवै; अपणपड़ोकरअर उसकमजदा। 14 कहवै, अपणतर ा-़ा घर अर हवऊपरठड़ी बणूँा,’ अर ििाँ बणउननवदकड़ी ै, अर िै। 15 वदकड़ी इचकरण आळै, इस तरिां बणरहवा। , ििअर िकतकरयकरदा, अर अर रहयकरदा! 16 इस रण रहवूँअर गरणसां करदा। खणै? यहै। 17 िअपणयदै, अर कसकरण अर अर उडकरण अपणमन अर नजर लगै।"

18 इस करकियहयहयहकहवै: "ितरिां णस इस ि कहकैं, , !इस तरिां रभु,’ भव,कहकउसकतर िकरा। 19 बलकउस ीं गधतरिां ी, घसयरशलटकां हर ेंिा।"

20 यरशलणसों "लबचढय-हकर, ्‍आवि्‍ा; अबपहय-हकर, ूँैं। 21 बखत मन्‍ीं िा, पर तन्‍कहा, ी।’ जवइसणदी। 22 चरवहवउड़ाैंे, अर चलैंे; पक्‍उस बखत अपणईयाँ रण शरिअर ुँा। 23 लबरहण आळ22:23 हे लबानोन की रहण आळी लबानोन किसी भी शानदार जगहां खात्तर उदाहरण था। उरै वो यरुशलेम के खात्तर काम म्ह लेई गई सै पर इसका खास संदर्भ राजाओं तै सै जो देवदार की छात के राजमहलां म्ह निवास करण पै घमण्ड करै थे।, वदअपणोंसलबणआळो, िीं जच्‍ि़ा उठी!"

यहीं परमसवर सज

24 "यहै: वन कसम, यहयह, ओळहर आळा, उस ीं ेंकदा। 25 तन्‍मनां , अर िनतडरउनकिनबकदनसर अर कसदिाँ कर ा। 26 तन्‍जनसमएक परजनम-भि ेंा, अर थम ओड़ैमर ओगे। 27 पर िहडबड़ी लसकरैं, ओड़ै कदहडैंें।"

28 े, णस िकमअर बरतन ै? िकमबरतन ै? समअनजूँ िेंिा? 29 धरती, धरती, धरती, यहवचन ! 30 यहकहवै, "इस णस ीं ििो, उसकवन सही-सलमत ा; अर उसकधनवऊद गदिजमयहिाँ रभकरण आळा।"

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