1 फेर यहोवा नै मेरे ताहीं कह्या, "जै मूसा अर शमूएल भी मेरे स्याम्ही खड़े होन्दे, तोभी मेरा मन इन माणसां की ओड़ ना फिरदा। इननै मेरे स्याम्ही तै लिकाड़ द्यो के वे लिकड़ जावैं! 2 अर जै वे तेरै तै पूच्छै ‘हम कित्त लिकड़ जावां?’ तो कहिये ‘यहोवा न्यू कहवै सै, जो मरण आळे सैं, वे मरण नै चले जावैं, जो तलवार तै मरण आळे सैं, वे तलवार तै मरण नै; जो काळ तै मरण आळे सैं, वे काळ तै मरण नै, अर जो कैदी बणण आळे सैं, वे गुलाम्मी म्ह चले जावैं।’ 3 मै उनके खिलाफ च्यार तरियां के विनाश ठहराऊँगा: मार डालण कै खात्तर तलवार, पाड़ डालण कै खात्तर कुत्ते, नोच डालण कै खात्तर अकास के पंछी, अर पाड़कै खाण कै खात्तर मैदान के हिंसक जन्तु, यहोवा की या वाणी सै। 4 या हिजकिय्याह के बेट्टे, यहूदा के राजा मनश्शे के उन उल्टे काम्मां कै कारण होवैगा जो उसनै यरुशलेम म्ह करे सैं, अर मै उननै इसा करुँगा के वे धरती के राज्य-राज्य म्ह मारे-मारे फिरैगें।"
5 "हे यरुशलेम, तेरै पै कौण तरस खावैगा, अर कौण तेरे खात्तर शोक करैगा? कौण तेरा सही-सलामत पूछण नै तेरी ओड़ मुड़ैगा? 6 यहोवा की या वाणी सै के तू मेरे ताहीं छोड़कै पाच्छै हटगी सै, इस करकै मै तेरै पै हाथ बढ़ाकै तेरा नाश करुँगा; क्यूँके, मै तरस खान्दे-खान्दे थक ग्या सूं। 7 मन्नै उन ताहीं देश के फाटकां म्ह जेळी तै पटक दिया सै; उननै गलत रास्ते ताहीं न्ही छोड्या, इस कारण मन्नै अपणी प्रजा ताहीं मजबूर कर दिया, अर नाश भी करया सै। 8 उनकी विधवाएँ मेरे देखण म्ह समुन्दर के रेतकणा तै घणी होगी सैं; उनके जवान्नां की माँ कै बिरुध्द दोपहर ए ताहीं मन्नै लुटेरयां ताहीं ठहराया सै; मन्नै उननै चाणचक संकट म्ह गेर दिया अर डरा दिया सै। 9 सात लड़क्यां की माँ भी बेहाल होगी अर प्राण भी छोड़ दिया; उसका सूरज दोपहर ए म्ह डूब ग्या; उसकी उम्मीद टूट गई अर उसका मुँह काळा होग्या। अर जो रहगे सैं उननै भी मै दुश्मनां की तलवार तै मरवा गेरूँगा," यहोवा की योए वाणी सै।
10 हे मेरी माता, मेरे पै हाय, के तन्नै मेरे बरगे इसे माणस ताहीं पैदा करया जो संसार भर तै झगड़ा अर वाद-विवाद करण आळा ठहरया सै! ना तो मन्नै ब्याज खात्तर रपिये दिए, अर ना किसे तै उधार लिए सैं, तोभी माणस मेरे ताहीं कोसै सैं। 11 यहोवा नै कह्या, "पक्का मै तेरी भलाई कै खात्तर तेरे ताहीं मजबूत करुँगा; विपत्ति अर दुख कै बखत मै दुश्मन तै भी तेरी बिनती कराऊँगा। 12 के कोए पीतळ या लोहा, यानिके उत्तर दिशा का लोहा तोड़ सकै सै? 13 तेरे सारे पापां कै कारण जो सारी जगहां देश म्ह होवै सैं मै तेरी जायदाद अर खजाने, बिना दाम दिए लूट जाण देऊँगा। 14 मै इसा करुँगा के वो दुश्मनां कै हाथ इसे देश म्ह चल्या जावैगा जिसनै तू न्ही जाणदी, क्यूँके मेरे छो की आग भड़क उठी सै, अर वो थारे ताहीं जळावैगी।"
15 हे यहोवा, तू तो जाणै सै; मेरे ताहीं याद कर अर मेरी सुधि लेकै मेरे सताण आळयां तै मेरा पलटा ले। तू धीरज के गैल छो करण आळा सै, इस करकै मेरे ताहीं ना ठा ले; तेरे ए मुताबिक मेरी नामधराई होई सै। 16 जिब तेरे वचन मेरे धोरै पोहचे, फेर मन्नै उन ताहीं मानो खा लिया, अर तेरे वचन मेरे मन के खुशी अर आनन्द का कारण होए; क्यूँके, हे सेनाओं के परमेसवर यहोवा, मै तेरा कुह्वाऊँ सूं। 17 तेरी छाया मेरे पै होई; मै मन बहलाण आळयां कै बीच बैठकै खुश न्ही होया; तेरे हाथ कै दबाव तै मै एक्ला बैठ्या, क्यूँके तन्नै मेरे ताहीं छो तै भर दिया था। 18 मेरी पीड़ा क्यूँ लगातार बणी रहवै सै? मेरी चोट की क्यूँ कोए दवाई कोनी? के तू सचमुच मेरे खात्तर धोखा देण आळी नदी अर सुखण आळे पाणी की तरियां होग्या?
19 या सुणकै यहोवा नै न्यू कह्या, "जै तू फिरे, तो मै फेर तै तेरे ताहीं अपणे स्याम्ही खड्या करुँगा। जै तू अनमोल ताहीं कहवै अर निकम्मे ताहीं ना कहवै, फेर तू मेरे मुँह की तरियां होवैगा। वे माणस तेरी ओड़ फिरैंगे, पर तू उनकी ओड़ ना फिरणा। 20 मै तेरे ताहीं उन माणसां कै स्याम्ही पीतळ की मजबूत शहरपनाह बणाऊँगा; वे तेरै तै लड़ैंगें, पर तेरै पै हावी ना होवैंगे, क्यूँके मै तेरे ताहीं बचाण अर तेरा उद्धार करण कै खात्तर तेरे गैल सूं, यहोवा की या वाणी सै। मै तेरे ताहीं निकम्मे माणसां के हाथ तै बचाऊँगा, 21 अर हुड़दंग करण आळे माणसां के पंजे तै छुड़ा लेऊँगा।"