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यिर्मयाह 36

मनदर जरििपढ

1 ियहयहयहओडवचन िमयहच2 "एक ि36:2 किताब (कुण्डळी ग्रन्थ) यो अनेक चर्मपत्रों को मिलाकै, बराबर की चौड़ाई म्ह काटकै एक लाकड़ी पै लपेट्या जावै था। जै वे घणे बड़े होन्दे तो दोन्‍नु सिरां पै लाकड़ी लगाई जावै थी। ितनवचन मन्‍ििां ििकरण उस बखत आज ितक इसएल अर यहअर िाँ कहैं, रयीं उस ि3 यहघरउस िपति खबर णकउनपरण जनबणगरयूं अपणिअर उनकअधरअर करुँ।"

4 आखर िमयिीं ा, अर यहवचन उसनिमयकहे, उसकुँणकििि5 िमयीं कम िअर कहा, "ूं, यहभवन सकदा। 6 इस करकउपवियहभवन उसकवचन तन्‍णकिैं, िणसां ीं पढा, अर ितनयहणस अपणे-अपणनगरां आवैंे, उन ीं पढा। 7 यहिि़ाथनकरैं36:7 गिड़गिड़ाकै प्रार्थना करैं यानिके दीन बणें इस म्ह प्रार्थना सुणे जाणे का भाव भी सै। अर अपणी-अपणिैं; ूँअर जळजळहट यहअपणइस रजभडकहै, बड़ा ै।" 8 िमयनबइस कम ििै, यहभवन उस िउसकवचन पढ

9 ियहयहाँचवें ें महि्‍यरशलितनणस े, अर यहनगरां ितनणस यरशलआए े, उननयहउपवकरण रचकरया। 10 यहभवन णसां ीं गमररधा, उसकठड़ी उपपर गण यहभवन नयटक ी, िमयवचन िपढ

जभवन िपढ

11 गमरयहवचन िे। 12 अर जभवन रधठड़ी चलगया, अर ओड़ै एलरधअर शमदलअर अकबएलनअर गमरअर हननिदकिअर िैं। 13 ितनवचन उस बखत े, ििणसां ीं पढे, उन रयिकरया। 14 उननणकिां यहीं नतनअर अर पडा, कहण ा, "िितन्‍णसां ीं पढै, उसनअपण" िििउनकआया। 15 उन िां उसतकहा, "इब अर हमनपढा।" उन ीं पढिा। 16 िउननवचनां ीं िा, थरथरएक सरीं खण े; अर उननकहा, "हम जरइन वचनां िकरांे।" 17 उननकहा, "कह, तन्‍वचन उसकुँणकिे?" 18 उनतकहा, "वचन अपणुँीं गयअर इन ीं ििखदगया।" 19 िां कहा, "ा, अपणे-आपनअर िमयीं िा, अर णण थम िो।"

िजळ

20 िां िीं एलरधठड़ी धरकगण आए; अर ीं वचन कह 21 यहीं िआण तर ा, उसनउस ीं एलरधठड़ी ीं अर िै-खड़े उननपढा। 22 सरसम भवन ा, ूँां महअर उसकजळण गरी। 23 ियहपढिा, उसनउस ीं अर आग उस ेंिा; इस तरिां आग िजळकभसी। 24 पर डरयअर िअपणलत़े, िअर उसककरमचिाँ िइसकरया, िननवचन े। 25 एलन, अर दल, अर गमरिनतकरिीं जळै, पर उसनउनकएक ी। 26 जपयरहमीं अर अजएल सरीं अर अबीं कम िखक अर िमयनबीं पकडें, पर यहउननिा।

िमयजरििि

27 िउन वचनां िीं िमयुँण-सणकिी, जळिा, यहवचन िमयहच28 "एक और िउस यहयहजळहलिवचन िखदे। 29 अर यहयहकह, यहकहवै: तन्‍उस िीं कहकजळितन्‍उस ूँ िजरआकइस ीं करा, अर उस णस ीं ़ैअर पशीं। 30 इस करकयहयहयहकहवै, उसकऊद गदिजमरहवा; अर उसकइसेंिअर पड़ी रहवी। 31 उस ीं अर उसकअर करमचिाँ ीं उनकअधरदणा; अर ितनिपति मन्‍उनपअर यरशलिदयअर यहणसां रण कहै, अर िीं उननसच ा, उन ीं उनपूँा।’"

32 िमयसरििखक ीं ी, अर ियहयहआग जळी, उस वचनां ीं िमयुँण-सणकउस िि; अर उन वचनां उनकतरिां और बढ़ा गई

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