14 "हे भटकण आळे बाळकों, बोहड़ आओ, क्यूँके मै थारा माल्लिक सूं; यहोवा की या वाणी सै। थारे हर एक नगर तै एक, अर हर एक कुल तै दो ताहीं लेकै मै सिय्योन म्ह पोंहचा देऊँगा।"
15 "मै थमनै अपणे मन कै जिसा पाळी देऊँगा, जो ज्ञान अर बुद्धि तै थमनै चरावैंगे। 16 उन दिनां म्ह जिब थम इस देश म्ह बढ़ो, अर फूल्लो-फळो, तब माणस फेर इसा ना कहवैंगे, यहोवा के करार का सन्दूक; यहोवा की या भी वाणी सै। उसका विचार भी उनकै मन म्ह ना आवैगा, ना माणस उसके ना रहण तै चिन्ता करैंगे; अर ना उसकी मरम्मत होवैगी।