कुम्हार अर माट्टी
1 यहोवा की ओड़ तै या वचन यिर्मयाह के धोरै पोहच्या, "उठकै कुम्हार कै घर जा, 2 अर ओड़ै मै तेरे ताहीं अपणे वचन सुणाऊँगा।" 3 इस करकै मै कुम्हार कै घर गया अर के देख्या के वो चाक पै कुछ बणाण लागरया सै! 4 जो माट्टी का बरतन वो बणाण लागरया था वो बिगड़ ग्या, फेर उसनै उसे माट्टी का दूसरा बरतन अपणी समझकै मुताबिक बणा दिया।
5 फेर यहोवा का या वचन मेरे धोरै पोहच्या, 6 "हे इस्राएल के घराने, यहोवा की या वाणी सै के इस कुम्हार की तरियां थारे गैल के मै भी काम न्ही कर सकदा? देख, जिस तरियां माट्टी कुम्हार कै हाथ म्ह रहवै सै, उसे तरियां ए हे इस्राएल के घराने, थम भी मेरे हाथ म्ह सो।