5 फेर आंध्याँ की आँख खोल्ली जावैंगी अर बैहरयां के कान भी खोल्ले जावैंगे; 6 फेर35:6 फेर मत्ती 11:5; यशा. 41:17,18 लंगड़ा हिरण की जिसी चौकड़ी भरैगा अर गूँगे अपणी जीभ तै जयजयकार करैंगे। क्यूँके जंगळ म्ह पाणी के चोए फूट लिकड़ैंगे अर मरुभूमि म्ह नदी बहण लाग्गैंगी;
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