3 वो लोग न्यू कहवै सैं, ‘के कारण सै के हमनै उपवास राख्या, पर तन्नै इसकी सुधि न्ही ली? हमनै दुःख ठाया, पर तन्नै कुछ ध्यान न्ही दिया?’ यहोवा उनतै न्यू कहवै सै, सुणो, उपवास के दिन थम अपणी ए इच्छा पूरी करो सों अर अपणे सेवकां तै मुश्किल काम कराओ सों। 4 सुणो, थारे उपवास का फळ यो होवै सै के थम आप्पस म्ह लड़ो अर झगड़ो अर बुराई तै घूँसे मारो सों। जिसा उपवास थम आजकाल राक्खों सों, उसतै थारी प्रार्थना परमेसवर नै सुणाई न्ही देवैगी। 5 जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं यानिके जिस म्ह माणस खुद नै दीन करै, के थम इस तरियां करो सों? के सिर नै झाऊ की तरियां झुकाणा, अपणे नीच्चै टाट बिछाणा, अर राख फैलाण नै ए थम उपवास अर यहोवा नै खुश करण का दिन कहों सों?"
6 "जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं58:6 लूका. 4:18,19; नीति. 21:3; याकू. 1:27, वो के यो न्ही, के, अन्याय तै बणाये होए दास्सां, अर अंधेर सहण आळयां का जूआ तोड़कै उननै छुड़ा लेणा, अर, सारे जूयां ताहीं टुकड़े-टुकड़े कर देणा?