6 "जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं, वो के यो न्ही, के, अन्याय तै बणाये होए दास्सां, अर अंधेर सहण आळयां का जूआ तोड़कै उननै छुड़ा लेणा, अर, सारे जूयां ताहीं टुकड़े-टुकड़े कर देणा?
Publicidade
Publicidade
6 "जिस उपवास तै मै खुश होऊँ सूं, वो के यो न्ही, के, अन्याय तै बणाये होए दास्सां, अर अंधेर सहण आळयां का जूआ तोड़कै उननै छुड़ा लेणा, अर, सारे जूयां ताहीं टुकड़े-टुकड़े कर देणा?