4 क्यूँके तू संकट म्ह दीन माणसां कै खात्तर गढ़, अर जिब भयानक माणसां का झोंका दीवार पै बौछार की तरियां होवै था, फेर तू गरीबां कै खात्तर उनकी शरण, अर तपण म्ह छाया का स्थान होया।
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4 क्यूँके तू संकट म्ह दीन माणसां कै खात्तर गढ़, अर जिब भयानक माणसां का झोंका दीवार पै बौछार की तरियां होवै था, फेर तू गरीबां कै खात्तर उनकी शरण, अर तपण म्ह छाया का स्थान होया।