परमेसवर के लोग्गां नै शान्ति
1 यशायाह40:1 यशायाह भजन. 85:8; 2 कुरि. 1:4 नै फेर भविष्यवाणी करी, "म्हारा परमेसवर न्यू कहवै सै, मेरी प्रजा नै शान्ति द्यो, शान्ति द्यो!" 2 यरुशलेम तै शान्ति की बात कहो; अर उसतै पुकारकै कहो के तेरी मुश्किल सेवा पूरी होई सै, तेरे अधर्म की सजा कबूल कर ली गई सै: यहोवा के हाथ तै तू अपणे सारे पाप की दुगणी सजा पा चुक्या सै।
3 किसे की पुकार सुणाई देवै सै40:3 मत्ती 3:3; मर. 1:3; मला. 3:1; यूह. 1:23, "जंगळ म्ह यहोवा का राह सुधारो, म्हारे परमेसवर कै खात्तर अराबा म्ह एक राजमार्ग चौरस करो। 4 हर एक तराई भर दी जावै अर हर एक पहाड़ अर पहाड़ी गिरा दी जावै; जो टेढ़ा सै वो सीध्धा अर जो ऊँच्चा नीच्चा सै वो चौरस करया जावै। 5 फेर40:5 फेर भजन. 72:19; लूका. 3:6 यहोवा का तेज प्रगट होवैगा अर सारे प्राणी उस ताहीं एक साथ देखैगें; क्यूँके यहोवा नै खुद ए इसा कह्या सै।"
6 बोलण आळे का वचन सुणाई दिया, "प्रचार कर!" मन्नै कह्या, "मै के प्रचार करुँ?" सारे प्राणी घास सैं, उनकी शोभा मैदान के फूल की तरियां सै। 7 जिब यहोवा की साँस40:7 साँस इब्रानी भाषा मै रुआक शब्द साँस के लिए आत्मा होवै सै उसपै चाल्लै सै, फेर घास सूख जावै सै, अर फूल मुरझा जावै सै; बेसक प्रजा घास सै। 8 घास तो सूख जावै, अर फूल मुरझा जावै सै; पर म्हारे परमेसवर का वचन सदा अटल रहवैगा40:8 म्हारे परमेसवर का वचन सदा अटल रहवैगा परमेसवर का वचन का संदर्भ या तो गुलाम्मी तै उसकी प्रजा की रक्षा अर उद्धार की प्रतिज्ञा तै सै या सामान्य मतलब हो सकै सै के उसकी प्रतिज्ञाएँ मजबूत अर बिना बदलण आळी सै।।
9 हे सिय्योन नै शुभ समाचार सुणाण आळी, ऊँच्चे पहाड़ पै चढ़ जा; हे यरुशलेम नै शुभ समाचार सुणाण आळी, घणे ऊँच्चे शब्द तै सुणा, ऊँच्चे शब्द तै सुणा, ना डरै; यहूदा के नगरां तै कह, "अपणे परमेसवर नै देक्खो!" 10 देक्खो, प्रभु यहोवा ताकत दिखान्दा होया आण लागरया सै, वो अपणे भुजबल तै राज करैगा; देक्खो, जो मजदूरी देण की सै वो उसके धोरै सै अर जो बदला देण का सै वो उसके हाथ म्ह सै। 11 परमेसवर40:11 परमेसवर यहे. 34:23; मीका. 5:4 पाळीयाँ की तरियां अपणे झुण्ड नै चरावैगा, वो भेड्डां के बच्चयां नै गोद म्ह लिए रहवैगा अर दूध पिलाण आळियाँ नै सहज-सहज ले चाल्लैगा।
इस्राएल का अतुल्यनीय परमेसवर
12 किसनै महासागर ताहीं चुळु तै माप्या अर किसके फित्ते तै अकास का नाप होया, किसनै धरती की माट्टी ताहीं नपुए म्ह भरया अर पहाड़ां ताहीं तराजू म्ह अर पहाड़ियाँ ताहीं काण्डे म्ह तोल्या सै? 13 किसनै यहोवा की आत्मा ताहीं राह बताया या उसका सलाहकार होकै उस ताहीं ज्ञान सिखाया सै40:13 सलाहकार होकै उस ताहीं ज्ञान सिखाया सै वो सलाह कै खात्तर ना तो माणसां पै ना ए स्वर्गदूतां पै निर्भर करै सै। वो सर्वोच्च सै, आत्म-निर्भर सै अर अनन्त सै। उसनै सलाह देण लायक कोए न्ही सै।? 14 उसनै किसपै तै सलाह ली अर किसनै उस ताहीं समझाकै न्याय का रास्ता बता दिया अर ज्ञान सिखाकै बुद्धि का राह बता दिया सै? 15 देक्खो, जातियाँ तो डोल की एक बूँद या तराजू के पलड्या पै की धूळ कै लायक ठैहरी; देक्खो, यहोवा द्वीपां नै धूळ के किणक्यां की तरियां ठावै सै। 16 लबानोन के सारे पेड़ भी ईंधण कै खात्तर थोड़ा रहवैंगे अर उस म्ह के जीव-जन्तु होमबलि कै खात्तर काफी न्ही होवैंगे। 17 सारी जातियाँ उसके स्याम्ही कुछ न्ही सैं, वे उसकी नजर म्ह लेश अर शून्य तै भी कम ठैहरी सैं।
18 थम परमेसवर नै किसकी तरियां बताओगे अर उसकी बराबरी किसतै करोगे? 19 मूरत जिसनै कोए कारीगर ढाळै सै, सुनार उस ताहीं सोन्ने तै मढ़ै अर उसके खात्तर चाँदी की साँकळ ढाळकै बणावै सै। 20 जो कंगाल इतणी भेंट न्ही चढ़ा सकदा, वो इसा दरखत चुण लेवै सै जो ना सड़ै; फेर एक निपुण कारीगर ढूँढ कै मूरत खुदवावै अर उसनै इसा स्थिर करावै सै के वो हाल न्ही सकै।
21 के थम न्ही जाणदे? के थमनै न्ही सुण्या? के थारे ताहीं शरु तै ए न्ही बताया गया? के थमनै धरती की नींव पड़ण कै बखत तै ए विचार न्ही करया? 22 यो वो सै जो धरती के घेरे कै उप्पर अकासमण्डल पै विराजमान सै; अर धरती के रहण आळे टिड्डी की तरियां सै; जो अकास नै मलमल की तरियां फैलावै अर इसा ताण देवै सै जिसा रहण कै खात्तर तम्बू ताण्या जावै सै; 23 परमेसवर बड़े-बड़े हाकिमां नै निकम्मा कर देवै सै, अर धरती के अधिकारियां नै शून्य की तरियां कर देवै सै।
24 वे रोप्पे जान्दे, वे बोए जान्दे, उनके ठूँठ धरती म्ह जड़ पकड़ पान्दे के वो उनपै हवा बहावै अर वे सूख जान्दे, अर आँधी उननै भूसे की तरियां उड़ा ले जावै सै।
25 इस करकै थम मेरै ताहीं किसकी तरियां बताओगे के मै उसके बराबर ठहरूँ? उस पवित्र परमेसवर का योए वचन सै। 26 अपणी आँख उप्पर ठाकै आसमान ताहीं देक्खो, किसनै इन ताहीं बणाया? वो इन गणां नै गिण-गिणकै लिकाड़ै सै, उन सब नै नाम ले-लेकै बुलावै सै? वो इसा ताकतवर अर भोत ताकतवर सै के उन म्ह तै कोए बिना आए न्ही रहन्दा।
27 हे याकूब, तू क्यूँ कहवै सै, हे इस्राएल तू क्यूँ बोल्लै सै, "मेरा राह यहोवा तै छिप्या होया सै, मेरा परमेसवर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता न्ही करदा?" 28 के थम न्ही जाणदे? के थमनै न्ही सुण्या? यहोवा जो सनातन परमेसवर अर धरती भर का सृजनहार सै, वो ना थकदा, ना आराम की जरूरत सै, उसकी बुद्धि अगम सै। 29 वो थके होया नै बल देवै सै अर कमजोर नै घणी ताकत देवै सै। 30 तरूण तो थक जावै सै अर उननै आराम की जरूरत होवै सै, अर जवान ठोक्कर खाकै गिर जावै सै; 31 पर जो यहोवा की मदद खात्तर बाट देक्खै सै, वे नया बल पान्दे जावैंगे, वे उकाबां की तरियां उड़ैंगे, वे दौड़ैंगे अर उननै आराम की जरूरत न्ही होवैगी, वे चाल्लैगें अर थकैंगे न्ही।