19 देक्खो, मै एक नई बात करुँ सूं; वो इब्बे जाहिर होवैगी, के थम उसतै अनजाण रहोगे? मै जंगळ म्ह एक राह बणाऊँगा अर निर्जल देश म्ह नदियाँ बहाऊँगा।
19 देक्खो, मै एक नई बात करुँ सूं; वो इब्बे जाहिर होवैगी, के थम उसतै अनजाण रहोगे? मै जंगळ म्ह एक राह बणाऊँगा अर निर्जल देश म्ह नदियाँ बहाऊँगा।