10 मै तो अन्त की बात शरुआत तै अर पुराणे बखत तै उस बात ताहीं बतान्दा आया सूं जो इब ताहीं न्ही होई। मै कहूँ सूं, ‘मेरी युक्ति स्थिर रहवैगी46:10 मेरी युक्ति स्थिर रहवैगी मेरा उद्देश्य, मेरी योजना, मेरी मर्जी स्थिर रहवैगी का मतलब सै, अचल, बस जाणा, बे फिक्र होणा, स्थापित होणा अर मै अपणी इच्छा नै पूरी करुँगा।’