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यशायाह 46

10 अनशरआत अर बखत उस ीं बतआयूं इब ीं कहूँ ूं, ि िरहव46:10 मेरी युक्ति स्थिर रहवैगी मेरा उद्देश्य, मेरी योजना, मेरी मर्जी स्थिर रहवैगी का मतलब सै, अचल, बस जाणा, बे फिक्र होणा, स्थापित होणा अर अपणइचकरुँा।’

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