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यशायाह 66

परमसवर जरिि-ि

1 यहकहवै:66:1 प्रेरि. 7:48-50; मत्ती 5:34,35 "अकिंसन अर धरतचरण्‍ै; थम तर िभवन बणओगे, अर आरजगहां ी?" 2 यह66:2 भजन. 34:18; मत्ती 5:3 ै, बणैं, इस करकसब ैं। पर उसओडकरुँअर मन66:2 दीन अर दुखी मन इसा मन जो टूट्या होया हो, कुचल्या होया हो या पाप तै भोत घणा प्रभावित रहया हो। ो, अर वचन णकथरथरो।

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