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Isaías 33

घणकट थन

1 ि्‍33:1 धिक्‍कार उरै बैरी अश्शूर सै करण आळकरयगया; ि्‍ै, ै, िसककरयगया! िकर े, करया; अर िकर े, करया।

2 यहा, दयकर; हम ां ां। तडतडउनकजबल, कट बखत उदरकरठहर3 यहगरजण णदश-दजगे, उठण आसै-4 ितरिां ििाँ चट करैं उसतरिां चट करी, अर ितरिां ििाँ पड़ै ै, उसतरिां उसपपड़ैंे।

5 यहमहै, ्‍33:5 सुर्ग म्ह रहवै; उसनिीं अर िकतभरपकरयै; 6 अर उद, ि अर बहयत िां ींी; यहभय उसकधन ा।

7 , उनकरवणस33:7 यरुशलेम के बहादुर सिपाही हर ि्‍गरैं; िलख-बिलख गरैं। 8 जमनसपड़े ैं, उनपिइब े। उसनकरीं िा, नगरां ीं िकमा, उसनणस ीं समझया। 9 धरतिकरदै; लबहळअर रझै; ितरिां ा; अर करपह़ी पतझडरहयै।

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10 यहकहवै, इब उठूँा, अपणरतिा; इब महनतिकरुँा। 11 गररहवा, ी; ाँआग थमनभसकरी। 12 श-दणस33:12 यहूदा के सताण आळे ूँ्‍तरिां ैंे, अर कट़िाँ तरिां आग जळैंे।

13 र-दणसों33:13 या यहोवा की वाणी सै के अश्शूरों की सेना का विनाश इसा संकेत सै जो दूर-दूर के देशां ताहीं पोहचै सै अर या उनकै खात्तर एक चेतावनी सै।, मन्‍करयै? अर थम ों, पररम ो। 14 िथरथरैं; भगतिां पकै: घणआग रह सकै? उस आग बणरह सककदी? 15 िकतलदअर ्‍ै; अनयदनफरत करै, िसवत ा; णदबनकरै, अर खण ूंै। ओड़ै ्‍जगहां िकरा। 16 चटां गढां शरण िरहवा; उसनिअर कमकदी।

उजजवल भवि

17 अपणां यहउसकसमा; अर े-़े नजर करा। 18 भय िां करा: आळअर कर लकआळिरहया? मटां िणन आळिरहया? 19 िनकिसमझदा, अर िनकलडखड़ासमझ सकदउन िदयणसां ा। 20 नगर िनजर कर! अपणां यरशला, आरजगहां, अर इसतमकदिा, िसकूँकदउखा, अर रसकदी। 21 ओड़ै महरतयहतर रहवा, घणबड़ी-बड़ी नदअर नहरां जगहां ी, िपतवआळ्‍अर यमजहउस ा। 22 ूँयही, यहि, यहै; ओड़ै उदकरा।

23 रस्‍ी, मसजडमजबसक33:23 मस्तूल की जड़ नै मजबूत ना राख सकी वे उसनै मजबूती तै बाँध ना सकी। यो तो साफ सै के जै मस्तूल मजबूत ना हो तो जहाज ताहीं चलाणा मुश्किल सै।, अर सकी। बड़ी सकगई, गड़े णस ि

24 िकहवूं; अर णस िबसैंे, उनकअधरकरया।

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