13 "जै तू विश्रामदिन नै अशुद्ध ना करै यानिके मेरे उस पवित्र दिन म्ह अपणी इच्छा पूरी करण की कोशिश ना करै, अर विश्रामदिन नै आनन्द का दिन अर यहोवा का पवित्र करया होया दिन समझकै मान्नै; जै तू उसका सम्मान करकै उस दिन अपणी राह पै ना चाल्लै, अपणी इच्छा पूरी ना करै, अर अपणी ए बात ना बोल्लै, 14 तो तू यहोवा कै कारण सुखी होवैगा, अर मै तेरे ताहीं देश की ऊँच्ची जगहां पै चाल्लण देऊँगा; मै तेरे मूलपुरुष याकूब के हिस्से की फसल म्ह तै तेरे ताहीं खुवाऊँगा, क्यूँके यहोवा ए कै मुँह तै यो वचन लिकड्या सै।"
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