14 तू पशुओं के लिये घास,
और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है,
और इस रीति भूमि से वह भोजन-वस्तुएँ उत्पन्न करता है
15 और दाखमधु जिससे मनुष्य का मन आनन्दित होता है,
और तेल जिससे उसका मुख चमकता है,
और अन्न जिससे वह सम्भल जाता है।
14 तू पशुओं के लिये घास,
और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है,
और इस रीति भूमि से वह भोजन-वस्तुएँ उत्पन्न करता है
15 और दाखमधु जिससे मनुष्य का मन आनन्दित होता है,
और तेल जिससे उसका मुख चमकता है,
और अन्न जिससे वह सम्भल जाता है।
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