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Salmos 112

धरयकि लकषण

1 यहि करो!

धनवह यहभय नतै,

और उसकआजअति रसनरहतै!

2 उसकपर पररम112:2 उसकपर पररमा: उसकसन, उसकशज अरसमोंे, समिोंे, मनों मधअपनपहचरखेंे। ;

ों सनआशएगी।

3 उसकघर ें धन-समपति रहतै;

और उसकधरसदबनरहा।

4 ों िधकें ि उदय ै;

वह अनरहकी, दयवनऔर धरै।

5 यकि अनरह करतऔर उधै,

और ईमनदअपनकरतै, उसककलै।

6 वह सदतक अटल रहा;

धरमरण सदतक बनरहा।

7 वह समनहीं डरता;

उसकदय यहपर भररखनिरहतै।

8 उसकदय समभलै, इसलिवह डरा,

वरनअपनशतपर ि करकसना।

9 उसनउदरतदरिों ि112:9 उसनउदरतदरिों िा: वह उदवह हसै। वह आवशयकतरसऔर अभों ें ाँै।,

उसकधरसदबनरहा;

और उसकींआदर िएगा। (2 ि. 9:9)

10 इसखकर ़ेा;

वह ाँस-पसकर गल एगा;

ों लसी। (ि. 7:54)

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