111 मैंने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भागकर लिया है,
क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण है।
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क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण है।
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