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भजन संहिता 141

और िों रकषण

ऊद भजन

1 यहा, ैंै; िकर!

जब ैं झकूँ, तब ओर लगा!

2 थनमनगन141:2 गन: थनसमऐसआरधनें उठतै।,

और ा, अननबलि ठहरे! (रका. 5:8, रका. 8:3,4, ि. 3:25,1 पत. 3:6)

3 यहा, ुँपर पहरा,

ों रखवकर! (ू. 1:26)

4 मन िओर िरने;

ैं अनरथकों ,

ों ें लगूँ,

और ैं उनकिजनवसें ँ!

5 धरयह करएगी,

और वह े, यह िपर ठहरा;

िउससइनकरा।

ों ों िैं िरनतर थनकरतरहूँा।

6 जब उनकचटऊपर िगए,

तब उनोंवचन ि; ोंि मधैं।

7 ि ें हल चलनटतैं141:7 ि ें हल चलनटतैं: ि:सनहम कबिें िखरहडिों सदैं। हम बल, , अवयवसिरतैं। ,

हमहडिाँ अधुँपर ितरगई ैं।

8 परनयहरभु, ें ओर लगैं;

ैं शरणगत ूँ; े!

9 उस े, उनोंिलगै,

और अनरथकिों रककर!

10 अपनों ें आप ें,

और ैं बच िकलूँ।

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