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भजन संहिता 142

अतहत िि

ऊद मश, जब वह ें ा: थन

1 ैं यहा,

ैं यहिि़ाूँ,

2 ैं अपनें उससलकर कहता,

ैं अपनकट उसकआगरगट करतूँ।

3 जब आततर रह142:3 जब आततर रही: कहनअरि कषों ें वह अशक, ि, और हता। वह कषों ि नहीं रहा।,

तब दशनता!

िैं ा, उसें उनोंिलगा।

4 ैंिओर ा, परननहीं खता।

िशरण कहीं नहीं रही, छतै।

5 यहा, ैंै;

ैंकहा, शरणसै,

ै।

6 िहट कर ,

ोंि बड़ी दशगई ै!

पड़े ैं, उनसबचे;

ोंि झसअधिमरैं।

7 बनि142:7 बनि: इस परििि उबे, यह िसमै। ैं ऐसूँ ैं कर िगयूँ। ि ैं धनयवकरूँ!

धरों ओर आएे;

ोंि उपककरा।

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