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भजन संहिता 19

ि िकरमहिवरणन

1 आकपरमवर महिवरणन करतै;

और आकशमणडल उसकहसतकलरगट करतै।

2 ििें करतै,

और िै।

3 और ा;

जहाँ उनकशबनहीं ै।

4 िउनकवर पर ूँगयै,

और उनकवचन जगत तक पहुँगयै।

उनमें उसनिएक मणडप खड़ा िै,

5 समअपनककिकलतै।

वह रवसमअपनें हरि19:5 रवसमअपनें हरिै: ें रवकरनमनसमशल और शकिी।

6 वह आकएक िकलतै,

और वह उसकसरतक चककर रतै;

और उसकगरनहीं बच ा।

7 यहयवसखरै, वह बहकर ै;

यहियम िसयैं,

िों िबनैं;

8 यहउपद19:8 यहउपद: उपदशबरयें सहअरै, आजा, आदियम, गदरशन िै। िैं, दय आननिकर ैं;

यहआजिमल ै, वह ों ें

ि आतै;

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