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Salmos 19

ि िकरमहिवरणन
रधबजिऊद भजन

1 आकपरमवर महिवरणन करतै;

और आकशमणडल उसकहसतकलरगट करतै।

2 ििें करतै,

और िै।

3 और ा;

जहाँ उनकशबनहीं ै।

4 िउनकवर पर ूँगयै,

और उनकवचन जगत तक पहुँगयै।

उनमें उसनिएक मणडप खड़ा िै,

5 समअपनककिकलतै।

वह रवसमअपनें हरिरवसमअपनें हरिै: ें रवकरनमनसमशल और शकिी।

6 वह आकएक िकलतै,

और वह उसकसरतक चककर रतै;

और उसकगरनहीं बच ा।

7 यहयवसखरै, वह बहकर ै;

यहियम िसयैं,

िों िबनैं;

8 यहउपदयहउपद: उपदशबरयें सहअरै, आजा, आदियम, गदरशन िै। िैं, दय आननिकर ैं;

यहआजिमल ै, वह ों ें

ि आतै;

9 यहभय पविै, वह अननतकतक िरहतै;

यहियम सतऔर ि धरममय ैं।

10 और बहदन बढकर मनहर ैं;

मधऔर छतटपकनमधबढकर मधैं।

11 उनीं िै;

उनकलन करनबड़ा रतिफल िलतै। (2 . 1:8, भज. 119:11)

12 अपनगलतिों समझ सकतै?

ों पविकर

13 अपनिों बचरख;

वह पर रभकरनँ!

तब ैं िा, और बड़े अपरों बचरहूँबड़े अपरों बचरहूँा: अरवह उस अपररहउसकों धन िियमरहतै।(ि. 15:30)

14 यहपरमवर, चटऔर उदकरने,

ुँवचन और दय समरहणयों।

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