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Salmos 26

एक खरयकि थन

ऊद भजन

1 यहा, कर,

ोंि ैं खरचलतरहूँ,

और भरयहपर अटल बनै।

2 यहा, ाँऔर परख26:2 ाँऔर परख: उसनयहचनि उसकिषय ें ियमनिएवअटल परिषण करे। ;

मन और दय परख

3 ोंि करों मनै,

और ैं सतपर चलतरहूँ।

4 ैं िकमचलनों नहीं ा,

और ैं कपटिों कहीं ा;

5 ैं करिों गति रखतूँ,

और ों ूँा।

6 ैं अपनों िषतजल 26:6 ैं अपनों िषतजल ा: भजनकअपनिषतएक और रमै। धतउसकवन एक रणमक ियम ि वह आरधनऔर पविरतें करे। ,

तब यहैं रदकिकरूँा, (भज. 73:13)

7 ि धनयवशबकरूँ,

और सब आशचरयकरों वरणन करूँ।

8 यहा, ैं

महििस-सि रखतूँ।

9 िों ,

और वन हतों ि26:9 वन हतों िा: रकतपकरनों, रकबहे, े, हत- ों वरणन करनशब

10 ओछपन करनें लगरहतैं,

और उनकिभररहतै।

11 परनैं खरचलतरहूँा।

़ा े, और पर दयकर

12 ाँरस ें िै;

सभें ैं यहधनकहकरूँा।

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