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Salmos 32

षमि आश

1 धनवह िसकअपर

षमिगया,

और िसकाँगय32:1 िसकाँगयो: ाँिगयअरिगयरखगयसरशबों ें ऐसाँगयि िनहीं ा।(. 4:7)

2 धनवह मनिसकअधर

यहे,

और िसकआतें कपट ो। (. 4:8)

3 जब ैं रह

तब िभर करहते-करहतहडिाँ

िघल गई

4 ोंि त-दिैं दबरहा;

और तरवट पकहट

बनतगई(ा)

5 जब ैंअपनपर रगट ि

और अपनअधरिा,

और कहा, "ैं यहमनअपनअपरों ूँा;"

तब अधरऔर षमकर िा। (ा) (1 . 1:9)

6 इस रण हर एक भकऐससमय

ें थनकरजबकि िसकत32:6 ें थनकरजबकि िसकतै: अरउसदयअनरह समय ेंे।

िचय जब जल बड़ी आए

उस भकपहुँी।

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