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Salmos 36

परमवर और मनटत
रधबजियहऊद भजन

1 जन अपरउसकदय तर कहतै;

परमवर भय उसकि ें नहीं ै। (. 3:18)

2 वह अपनअधररगट

और िठहरनिषय

अपनमन ें िकनपड़ी ें िरतै।

3 उसकें अनरऔर छल ैं;

उसनि और भलकरन

उठै।

4 वह अपनिपर पड़े-पड़े

अनरकलपनकरतवह अपनिपर पड़े-पड़े अनरकलपनकरतै: जब वह और उसींनहीं आततब वह अनरजनबनै। ;

वह अपनपर बनरहतै;

वह नहीं उठा।

5 यहा, करवरें ै,

सचआकशमणडल तक पहुँै।

6 धरपरवतों समै,

अथगर समैं;

यहा, मनऔर पशों

रककरतै।

7 परमवर, करअनमै!

मनतलशरण ैं।

8 भवन जन

बहयत ोंे,

और अपननद

ें उनें िएगा।

9 ोंि वन वन ै: जहाँ समवन रविै। सब िउससवन ैं।;

रकहम रके। (यहू. 4:10,14, रका. 21:6)

10 अपनननों पर करकरतरह,

और अपनधर

मनवों ें करतरह!

11 अहपर उठ,

और अपन

बल भग

12 वहाँ अनरथकिपड़े ैं;

ढकिगए, और िउठ सकेंे।

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