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Salmos 39

ि और षमिथन
यदरधबजिऊद भजन

1 ैंकहा, "ैं अपनचलन ें कसकरूँा,

ि ो;

जब तक मनै,

तब तक ैं लगलगअपनुँबनिरहूँा।" (ू. 1:26)

2 ैं रण कर ूँबन गया,

और भलओर रहा;

और ़ा बढगई,

3 दय अनदर अनदर जल रहदय अनदर अनदर जल रहा: मन अधिििचलिगयऔर वनअधििरबल गईअपनवनदबरयिअधिरजवलिगई

चते-चतआग भडउठी;

तब ैं अपनउठा;

4 "यहा, ऐसकर ि अन

, और यह

ि आयिितनैं;

िससैं ूँ ि अनिूँ!

5 , आयिभर रखै,

और वनकि ें नहीं।

सचमसब मनि

ों ों यरठहरैं। (ा)

6 सचममनचलतिरतै;

सचमयरघबरैं;

वह धन चय करत

परननहीं नति उसा!

7 "अब रभु, ैं िूँ?

आशओर लगै।

8 सब अपरों बनधन ़ा े।

िकरन

9 ैं ूँबन गयैं ूँबन गया: उसनियत करनिुँनहीं ा; उसननहीं कहि परमवर उस पर िदयतिअनिा। और ुँा;

ोंि यह िै।

10 िपति पर

उसझसकर े,

ोंि ैं

भसूँ।

11 जब मनअधररण

ाँट-डपटकर ै;

तब उसकमरपतसमकरतै;

सचमसब मनिकरतैं।

12 "यहा, थन, और पर लगा;

नकर रह!

ोंि ैं एक परदसमरहतूँ,

और अपनसब रखसमपरदूँ। (इबा. 11:13)

13 आह! इससपहलि ैं यहाँ चल

और रह ँ,

बचिससैं रदवन करूँ!"

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