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Salmos 41

धरजन ़ा और आश

रधबजिऊद भजन

1 धनवह, ि रखतै!

िपति ियहउसकबचएगा।

2 यहउसकरककरकउसकिरखा,

और वह पर धना।

उसकशतइचपर ़।

3 जब वह ि शयपर पड़ा 41:3 जब वह ि शयपर पड़ा ो: कहनअरि परमवर उससहन षमता, उसकबल उपरवह उसशकि ा, आनतरिशकि। ,

तब यहउससमा;

ें उसकिउलटकर करा।

4 ैंकहा, "यहा, पर दयकर;

कर,

ोंि ैंििै!"

5 शतयह कहकर करतैं

"वह कब मरा, और उसककब िा?"

6 और जब वह झसिलनआतै,

तब वह यरें बकतै,

जबकि उसकमन अपनअनदर अधरें चय करतै;

और हर कर उनकचरकरतै।

7 सब िलकर िकरतैं;

िकर ि कलपनकरतैं।

8 कहतैं ि इसलग गयै;

अब यह पड़ा ै, िकभउठननहीं41:8 अब यह पड़ा ै, िकभउठननहीं: अब आशनहीं, इसकिउठ खड़े समवननहीं ै।

9 परम ििपर ैं भररखता,

ा,

उसनिउठै। (2 शमू. 15:12, . 13:18, ि. 1:16)

10 परनयहा, पर दयकरक

उठि ैं उनकबदलूँ।

11 शतपर जयवननहीं ा,

इससैंिि झसरसनै।

12 और खरसमलता,

और सरवदिअपनसमिकरतै।

13 इसएल परमवर यह

आदि अननतकतक धन

आम, िआम(1:68, भज. 106:48)

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